गुरुवार, 18 जून 2009

ज़हेरका इम्तेहान.....

बुज़ुर्गोने कहा, ज़हरका,
इम्तेहान मत लीजे,
हम क्या करे गर,
अमृतके नामसे हमें
कोई प्यालेमे ज़हर दीजे !
अब तो सुनतें हैं,
पानीभी बूँदभर चखिए,
गर जियें तो और पीजे !
हैरत तो ये है,मौत चाही,
ज़हर पीके, नही मिली,
ज़हर मे भी मिलावट मिले
तो बतायें, अब क्या कीजे?
तो सुना, मरना हैही,
तो बूँदभर अमृत पीजे,
जीना चाहो तभी ज़हर पीजे!

शमा

3 comments:

creativekona said...
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Shama said...

Hemantji,
Zyada galatfehmi na ho isliye aapse kshama mmangte hue apni post hata rahee hun! Ummeed hai aap bura nahee manenge !

'sammu' said...

maut chahee thee jahar me thee milawat koyee ?
vo tha amrit jise too jan naheen paya tha
uskee thee uskee zindgee milee jo thee uskee
apnee gaflat me naheen pyar jan paya tha

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