शुक्रवार, 5 जून 2009

दर्द नही रुलाता...

आज जब देख रही हूँ,
पीली पुरानी तस्वीरें ,
आ रहे हैं याद मुझे,
कितनेही गुज़रे ज़माने,
भूली नही पल एकभी,
ना ख़ुशी का, ना ग़म काही ,
पर आज हर लम्हये ख़ुशी,
खुनके आँसू रुला रही,
दर्द अब नही रुलाता,
उसकी तो आदत पड़ गयी,
ख़ुशी है जो नायाब बन गयी ....

2 टिप्‍पणियां:

  1. रोकीं हजार बार राहें नहीं रुकीं
    मंजिल हर एक बार पड़ाव ही निकली
    रिश्तों की चासनी में डूबे हजार बार
    लहराती हुई खुशबू पीले खतों से निकली
    बरसी हजार बार एक बार न बरसी तो
    बदली की बेबसी फिर आंसुओं से निकली

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